रांची, 19 सितंबर । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि एमएमडीआर अधिनियम को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस जनता के बीच भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। भाजपा तथ्यों के साथ जनता के बीच जाकर एमएमडीआर अधिनियम के प्रावधानों और उसके प्रभाव की जानकारी देगी तथा विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों का तथ्यात्मक जवाब देगी।
आदित्य साहू ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि पार्टी ने 19 से 30 सितंबर तक प्रदेशभर में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस दौरान भाजपा की ओर से प्रेस वार्ता , प्रखंड मुख्यालयों पर नुक्कड़ सभाएं, गोष्ठियां और एमएमडीआर अधिनियम की प्रतियां वितरित कर लोगों को कानून के प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। प्रदेश के नेता विभिन्न जिलों में निर्धारित कार्यक्रमों में शामिल होकर अधिनियम को लेकर पार्टी का पक्ष जनता के सामने रखेंगे। अभियान की शुरुआत विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को जमशेदपुर में प्रेस वार्ता के माध्यम से कर दी है।
आदित्य साहू ने कहा कि भाजपा के नेता और कार्यकर्ता प्रदेश के हर हिस्से में जाकर एमएमडीआर अधिनियम की जानकारी जनता के सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि झामुमो और कांग्रेस चाहे जितना भ्रम फैलाएं, भाजपा कार्यकर्ता तथ्यों के साथ जनता के बीच जाएंगे। जनता के सामने अब अधिनियम के वास्तविक प्रावधानों और उससे जुड़े तथ्यों को रखा जाएगा।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। एमएमडीआर अधिनियम को केवल झारखंड विरोधी बताने से पहले यह समझना जरूरी है कि यह पूरे देश के लिए लागू राष्ट्रीय कानून है। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा का लाभ तभी मिलेगा, जब खदानों का संचालन होगा। केवल विरोध और भ्रम की स्थिति से राज्य में निवेश और रोजगार के अवसर नहीं बढ़ेंगे।
आदित्य साहू ने दावा किया कि खनन से जुड़े करीब 90 प्रतिशत राजस्व का हिस्सा राज्यों के पास रहेगा। ऐसे में राज्यों का राजस्व छिनने की आशंका जताना उचित नहीं है। उनके अनुसार एमएमडीआर में किए गए संशोधन का उद्देश्य राज्यों का राजस्व छीनना नहीं, बल्कि खनन क्षेत्र में स्थिर और पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करना है।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड को भ्रम और आशंकाओं के बजाय स्पष्ट नीति तथा बेहतर खनिज प्रबंधन के माध्यम से आगे बढ़ना होगा। उनके अनुसार एमएमडीआर संशोधन का उद्देश्य खनन क्षेत्र में स्थिरता और पारदर्शिता बढ़ाने के साथ निवेश तथा रोजगार की संभावनाओं को मजबूत करना है।
साहू ने कहा कि एमएमडीआर अधिनियम में राज्यों के राजस्व और अधिकार सुरक्षित हैं। उनके मुताबिक राज्यों की रॉयल्टी, प्रीमियम, जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) और जीएसटी से संबंधित राजस्व प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अधिनियम के माध्यम से अवैध खनन पर भी प्रभावी नियंत्रण की व्यवस्था मजबूत होगी।
आदित्य साहू ने कहा कि एमएमडीआर अधिनियम का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में स्थिरता, पारदर्शिता और विकास को गति देना तथा राज्यों के राजस्व हितों की रक्षा करना है।
साहू ने दावा किया कि कांग्रेस शासित केरल, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक सहित देश के अन्य हिस्सों में इस कानून को लेकर वैसा विरोध नहीं है, जैसा झारखंड में विपक्षी दलों की ओर से किया जा रहा है। उन्होंने झामुमो और कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने कोयले की कथित अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने का काम किया है और इसी कारण विपक्षी दल एमएमडीआर अधिनियम का विरोध कर रहे हैं। हालांकि, यह आरोप भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का राजनीतिक दावा है।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा पर राजनीति करने वालों को यह भी बताना चाहिए कि वर्षों से हो रहे कथित अवैध खनन और खनिज संपदा की लूट को रोकने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी के बजाय एमएमडीआर अधिनियम के वास्तविक प्रावधानों और उसके प्रभावों पर तथ्य आधारित चर्चा होनी चाहिए। भाजपा हर मंच पर तथ्यों के साथ अपनी बात रखेगी।
साहू ने कहा कि हाल में झारखंड भाजपा की ओर से एमएमडीआर अधिनियम के समर्थन में चलाया गया हैशटैग ‘झारखंड विथ एमएमडीआर’ सोशल मीडिया पर देशभर में नंबर-वन पर ट्रेंड कर चुका है। उन्होंने इसे अधिनियम के समर्थन में व्यापक जनसमर्थन का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के बीच विकास, पारदर्शिता और जनहित से जुड़े मुद्दों को तथ्यों के साथ लेकर जाएगी।
