कोलकाता, 17 सितंबर। बांकुड़ा के सांसद अरूप चक्रवर्ती को एक मामले में बड़ी राहत मिली है। लोकपाल ने उनके खिलाफ लगे भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में उनके खिलाफ कोई भी पर्याप्त सबूत नहीं मिला है। बता दें कि 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद अरूप चक्रवर्ती तृणमूल कांग्रेस छोड़कर पार्टी के बाकी सांसदों के साथ एनसीपीआई में शामिल हो गए थे।
लोकपाल ने स्पष्ट किया है कि सीबीआई की शुरुआती जांच में आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सुराग नहीं मिला। सांसद अरूप चक्रवर्ती ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण और बेबुनियाद थे, जो अब लोकपाल के आदेश से साफ हो गया है।
सांसद पर आरोप था कि वह अपने भाई आशीष चक्रवर्ती के साथ मिलकर इलाके में अवैध गतिविधियों को अंजाम देते थे। उन पर स्थानीय कार्यकर्ताओं और अधिकारियों की मदद से भ्रष्टाचार करने, अवैध रूप से पैसे वसूलने और लोगों को डराने-धमकाने का आरोप था।
शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि अरूप ने सरकारी मछली पालन परियोजना में गड़बड़ी की थी और साल 2016 से अपने इलाके की एक झील से हर महीने 50 लाख रुपये वसूल रहे थे।
इन गंभीर आरोपों के आधार पर 10 नवंबर को सीबीआई जांच के आदेश दिए गए थे। जांच के बाद सीबीआई ने 28 अगस्त को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी ने 45 से ज्यादा दस्तावेजों की बारीकी से जांच की और छह गवाहों के बयान भी दर्ज किए। इसके बाद 10 सितंबर को लोकपाल के अध्यक्ष जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय पीठ ने इस मामले को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
गुरुवार को जारी अपने बयान में पीठ ने कहा कि शुरुआती जांच रिपोर्ट में सभी सबूतों की बारीकी से जांच की गई है और अरूप के खिलाफ लगाए गए छह आरोप साबित नहीं हो सके।
लोकपाल ने यह भी बताया कि जिन घटनाओं का जिक्र किया गया है, उस समय अरूप चक्रवर्ती सांसद नहीं बल्कि विधायक थे, इसलिए यह मामला सीधे तौर पर लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में भी नहीं आता है।
