hd

हजारीबाग, 24 अगस्त । झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि भारत की जनजातीय परंपरा देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता की महत्वपूर्ण धरोहर है। जनजातीय समाज ने प्रकृति के साथ संतुलित जीवन, सामुदायिक सहयोग तथा अपनी परंपराओं और संस्कृति के संरक्षण की समृद्ध परंपरा विकसित की है।

राज्यपाल सोमवार को हजारीबाग के ठाकुरबाड़ी मंदिर, बड़ा अखाड़ा में आयोजित ‘जनजातीय गौरव उत्सव’ के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनजातीय कला, हस्तशिल्प, हथकरघा और स्थानीय उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़कर इनके संरक्षण के साथ-साथ आजीविका के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं।

राज्यपाल ने कहा कि आज महिलाएं उद्यमिता, व्यापार, हस्तशिल्प, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण सहित विभिन्न आर्थिक गतिविधियों में अपनी पहचान बना रही हैं। महिला का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना न केवल उसके आत्मविश्वास को बढ़ाता है, बल्कि पूरे परिवार और समाज को भी सशक्त करता है।

उन्होंने कहा कि झारखंड सहित विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से महिला उद्यमियों एवं शिल्पकारों का उत्सव में शामिल होना अनुभव, कौशल और बाजार के अवसरों के आदान-प्रदान की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। स्थानीय उत्पादों को बेहतर डिजाइन, गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पहचान बना सकते हैं।

राज्यपाल ने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसी पहलों ने स्थानीय उत्पादों, कारीगरों, छोटे उद्यमियों और महिला शक्ति को आर्थिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा तभी व्यापक और समावेशी होगी, जब गांवों, जनजातीय क्षेत्रों, छोटे उद्यमियों और महिलाओं की प्रतिभा एवं क्षमता को पर्याप्त अवसर मिलेंगे।

राज्यपाल ने कहा कि झारखंड के जनजातीय समाज में समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ कौशल और उद्यमिता की भी अपार संभावनाएं हैं। पारंपरिक कलाओं एवं स्थानीय उत्पादों को प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराकर इन्हें आजीविका का मजबूत माध्यम बनाया जा सकता है।

उन्होंने युवाओं को पारंपरिक विरासत से जोड़ने के साथ कौशल, नवाचार और उद्यमिता के नए अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन को कम करने में भी मदद मिलेगी।

राज्यपाल ने महिला उद्यमियों और शिल्पकारों से अपने कौशल पर विश्वास रखने, गुणवत्ता को अपनी पहचान बनाने तथा बदलते बाजार की जरूरतों के अनुरूप निरंतर नवाचार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “परंपरा हमारी शक्ति है और नवाचार हमारी आवश्यकता है।”

राज्यपाल ने विश्वास जताया कि ‘जनजातीय गौरव उत्सव’ जैसे आयोजन जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ महिला उद्यमिता एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।