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रांची, 24 अगस्त । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार और झामुमो जिस तरीके से कथित रूप से फर्जी मुकदमों, पुलिसिया कार्रवाई और प्रतिबंधों का सहारा ले रहे हैं, वह नाजी शासन की कार्यशैली की याद दिलाता है।

शाहदेव ने सोमवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि धरना-प्रदर्शन से पहले अनुमति लेने और सोशल मीडिया पर कुछ लिखने या लाइक करने से पहले पुलिस सत्यापन जैसी बातें सामने आना गंभीर विषय है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या अब झारखंड में अपनी बात रखने के लिए भी नागरिकों को पुलिस से अनुमति लेनी होगी। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि “अघोषित आपातकाल की मानसिकता” है।

भाजपा नेता ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(बी) के तहत शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन उसकी आड़ में विपक्ष, छात्रों और आम नागरिकों की आवाज को दबाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

शाहदेव ने जेपीएससी मामले में राज्य सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय में मामला पेश होने से पहले राज्य के महाधिवक्ता को अग्रिम प्रति उपलब्ध कराई गई थी। इसके बावजूद, उनके अनुसार, पहली सुनवाई में एक जूनियर अधिवक्ता ने सरकार की ओर से पक्ष रखा और कथित तौर पर डिफेक्टिव याचिका का विरोध भी नहीं किया।

उन्होंने दावा किया कि दूसरी पारी में भी महाधिवक्ता ने अपने से जूनियर अधिवक्ता को सरकार की ओर से पक्ष रखने के लिए कहा।

शाहदेव ने सवाल उठाया कि जब सरकार को मामले की अग्रिम जानकारी थी, तो महाधिवक्ता के साथ उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ताओं को सरकार की ओर से पैरवी की जिम्मेदारी क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में विद्यार्थी सरकार से जवाब मांग रहे हैं।