कोलकाता, 05 अगस्त । पश्चिम बंगाल में प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों के ‘सरप्लस’ तबादले पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। बुधवार को न्यायमूर्ति विभाष पटनायक ने आदेश दिया कि राज्य सरकार फिलहाल किसी भी शिक्षक या शिक्षाकर्मी का सरप्लस के आधार पर तबादला नहीं करेगी। हालांकि, सरकार नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रख सकती है और इच्छुक शिक्षकों से आवेदन भी ले सकती है। मामले की अगली सुनवाई अगले बुधवार को होगी।
राज्य सरकार ने हाल ही में सरप्लस तबादले के लिए नई एसओपी जारी की थी। इसके तहत पहले स्वेच्छा से स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षकों से आवेदन मांगे गए थे। सरकार ने यह भी संकेत दिया था कि इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर अन्य शिक्षकों के तबादले पर भी निर्णय लिया जाएगा। इस संबंध में 15 जुलाई और 24 जुलाई को दो अलग-अलग एसओपी जारी की गई थीं।
इन दोनों एसओपी को चुनौती देते हुए कुछ शिक्षकों ने हाई कोर्ट का रुख किया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरप्लस तबादले में प्राथमिकता तय करने के मानदंड स्पष्ट नहीं हैं। उनके अनुसार यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्राथमिकता अधिक आयु वाले शिक्षकों को मिलेगी या अधिक सेवा अवधि वाले शिक्षकों को। इसी वजह से प्रक्रिया में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि एसओपी के आधार पर फिलहाल किसी भी शिक्षक या शिक्षाकर्मी का तबादला नहीं किया जाएगा। हालांकि, सरकार आवश्यक सूचनाएं एकत्र करने तथा अन्य प्रशासनिक तैयारियां जारी रख सकती है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2009 के शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अनुसार प्रत्येक 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक का अनुपात आदर्श माना गया है। पश्चिम बंगाल के कई प्राथमिक विद्यालयों में यह संतुलन नहीं है। कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों की तुलना में शिक्षकों की संख्या अधिक है, जबकि कई विद्यालयों में छात्रों की संख्या अधिक होने के बावजूद शिक्षकों की कमी है। इसी असंतुलन को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने सरप्लस तबादला नीति लागू करने का निर्णय लिया था।
