पटना, 03 अगस्त। बिहार की सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। लंबे समय तक देश के प्रमुख चुनावी रणनीतिकार के रूप में पहचान बनाने वाले प्रशांत किशोर ने इस जीत के साथ सक्रिय चुनावी राजनीति में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। चुनावी रणनीति तैयार करने वाले विशेषज्ञ से जनादेश प्राप्त जनप्रतिनिधि बनने तक का उनका सफर भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
प्रशांत किशोर का जन्म 20 मार्च 1977 को बिहार के रोहतास जिले के कोनार गांव में हुआ था। हालांकि उनका बचपन और प्रारंभिक जीवन मुख्य रूप से बक्सर में बीता। उनके पिता डॉ. श्रीकांत पांडेय सरकारी चिकित्सक थे और सरकारी सेवा के कारण परिवार लंबे समय तक बक्सर तथा शाहपुर में रहा। आज भी बक्सर में उनका पैतृक घर है, जहां परिवार के सदस्य रहते हैं। राजनीति में सक्रिय होने के बावजूद प्रशांत किशोर का अपने गांव और बक्सर से जुड़ाव बना हुआ है।
उनके परिवार की पृष्ठभूमि सामान्य रही है। पिता ने सरकारी चिकित्सक के रूप में लंबे समय तक सेवा दी, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। परिवार के अधिकांश सदस्य सार्वजनिक जीवन और राजनीति से दूर हैं। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार उनके चार भाई-बहन हैं। बड़े भाई अजय किशोर व्यवसाय से जुड़े हैं, जबकि अन्य सदस्य निजी जीवन व्यतीत करते हैं।
प्रशांत किशोर की पत्नी डॉ. जाह्नवी दास पेशे से चिकित्सक हैं और असम के गुवाहाटी की रहने वाली हैं। बताया जाता है कि दोनों की मुलाकात संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के एक स्वास्थ्य कार्यक्रम के दौरान हुई थी। पेशेवर परिचय धीरे-धीरे दोस्ती में बदला और बाद में दोनों ने विवाह किया। दंपति का एक बेटा है, जिसका नाम चुनावी हलफनामे के अनुसार दैबिक भारद्वाज है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रशांत किशोर का सफर उल्लेखनीय रहा है। प्रारंभिक शिक्षा बिहार में प्राप्त करने के बाद उन्होंने पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। इसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य (पब्लिक हेल्थ) के क्षेत्र में काम किया और संयुक्त राष्ट्र से जुड़कर स्वास्थ्य एवं विकास से संबंधित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में योगदान दिया।
संयुक्त राष्ट्र में कार्य करने के बाद उन्होंने चुनावी रणनीति के क्षेत्र में कदम रखा और जल्द ही देश के सबसे चर्चित राजनीतिक रणनीतिकारों में शामिल हो गए। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के चुनाव अभियान से जुड़ने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने विभिन्न राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए चुनावी रणनीति तैयार की और कई सफल चुनाव अभियानों का हिस्सा बने।
बाद के वर्षों में प्रशांत किशोर ने चुनावी सलाहकार की भूमिका से आगे बढ़ते हुए बिहार की राजनीति में सक्रिय प्रवेश किया। उन्होंने ‘जन सुराज’ अभियान की शुरुआत कर राज्यभर में व्यापक जनसंवाद यात्राएं कीं और संगठन निर्माण पर जोर दिया। इस अभियान के जरिए उन्होंने विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुशासन को अपनी राजनीति का प्रमुख आधार बनाया।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली जीत को उनके राजनीतिक जीवन का अहम मोड़ माना जा रहा है। इस जीत ने उन्हें केवल एक सफल चुनावी रणनीतिकार ही नहीं, बल्कि जनता के जनादेश से चुने गए सक्रिय राजनीतिक नेता के रूप में स्थापित कर दिया है। अब बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका, जन सुराज के विस्तार और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर राजनीतिक विश्लेषकों तथा आम जनता की नजरें टिकी हैं।
