vi

नई दिल्ली, 22 जुलाई । विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार को चीन, रूस, अमेरिका सहित विभिन्न देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की। चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठक के दौरान उन्होंने निष्पक्ष बाजार पहुंच, व्यापार संतुलन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दे उठाए।

प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान अपने शुरुआती वक्तव्य में जयशंकर ने कहा कि आधिकारिक स्तर पर तथा लोगों के बीच संपर्क को सुगम बनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही, दोनों देशों की साझा प्राथमिकताओं के अनुरूप विभिन्न तंत्रों और मंचों की बैठकों पर भी सहमति बननी चाहिए।

मनीला में आयोजित आसियान संबंधी बैठकों के इतर विदेश मंत्री ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने एक्स पर बताया कि बैठक के दौरान क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भारत की गंभीर चिंता दोहराई गई। दोनों नेताओं ने व्यापार एवं निवेश, ऊर्जा, संपर्क, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा लोगों की आवाजाही से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा की। बातचीत में व्यापार एवं टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा एवं सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा क्षेत्रीय, वैश्विक और बहुपक्षीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ बैठक में जयशंकर ने दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रहे सहयोग की समीक्षा की। बातचीत का केंद्र दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा निर्धारित द्विपक्षीय संबंधों के लक्ष्यों को आगे बढ़ाना रहा।

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ मुलाकात में प्रधानमंत्री मोदी की हालिया ऑस्ट्रेलिया यात्रा के परिणामों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में आगे भी विचार-विमर्श जारी रखने पर सहमति जताई।

जयशंकर ने सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन, थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री सिहासाक फुआंगकेटकियो तथा फिलीपींस की विदेश मंत्री मारिया थेरेसा पी. लाजारो से भी मुलाकात की। वहीं, न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स के साथ बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने समुद्री सहयोग को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार किया।