चेन्नई, 15 जुलाई। भारत के सबसे बड़े कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े हजारों दस्तावेज लीक होने का मामला सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ‘वर्ल्ड लीक्स’ नामक हैकर समूह ने डार्क वेब पर इन दस्तावेजों को अपलोड करने का दावा किया है। कथित रूप से लीक किए गए दस्तावेजों में पावर प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, कंट्रोल रूम का लेआउट, सप्लायर्स की सूची, निरीक्षण रिकॉर्ड तथा अन्य तकनीकी दस्तावेज शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित सर्वर मई 2026 में साइबर हमले का शिकार हुआ था, जबकि जून के अंत में दस्तावेज लीक होने का दावा किया गया। इस घटना की जानकारी अब सार्वजनिक हुई है।
कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट की यूनिट-3 और यूनिट-4 परियोजना के ठेकेदार रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने स्वीकार किया है कि उसके थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर प्रदाता योट्टा के सर्वर पर साइबर हमला हुआ था। कंपनी ने बताया कि घटना की सूचना सरकार को दे दी गई है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन-कौन सा डेटा प्रभावित हुआ है।
जानकारी के अनुसार, योट्टा ने 29 मई को अपने सर्वर पर संदिग्ध गतिविधि का पता लगाया था और दावा किया कि साइबर हमले को रोक दिया गया। इसके बावजूद हैकर समूह ने डार्क वेब पर करीब 8.58 लाख फाइलों में से लगभग 19 हजार संवेदनशील दस्तावेज अपलोड करने का दावा किया है।
मामले की समीक्षा न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर संयुक्त रूप से कर रहे हैं। वहीं, भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) भी साइबर हमले और कथित डेटा लीक की जांच में जुटी है। कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित देश की सबसे बड़ी परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है।
