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कोलकाता, 15 जुलाई । उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल के अधिकांश जिलों में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। अलीपुर स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा बुधवार को जारी विशेष बुलेटिन के अनुसार, उत्तर मध्य बंगाल की खाड़ी और उससे सटे बांग्लादेश तट पर एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है, जिसके अगले 24 घंटों में निम्न दबाव क्षेत्र में परिवर्तित होने की प्रबल संभावना है। इसके प्रभाव से राज्य में अगले चार दिनों तक व्यापक वर्षा और तेज आंधी-तूफान की स्थिति बनी रहने का अनुमान है।

मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण बंगाल के सभी जिलों में अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा अथवा गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। विशेष रूप से उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना, पूर्व एवं पश्चिम मेदिनीपुर तथा झाड़ग्राम जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा (सात से 11 सेंटीमीटर) की चेतावनी जारी की गई है। इन जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलने तथा वज्रपात की आशंका भी व्यक्त की गई है। कोलकाता सहित दक्षिण बंगाल के अन्य जिलों में भी 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं।

उत्तर बंगाल के पर्वतीय क्षेत्रों में भी मानसून का प्रभाव बढ़ गया है। मौसम कार्यालय ने दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। इसके अतिरिक्त कालिम्पोंग, अलीपुरद्वार और कूचबिहार समेत उप-हिमालयी क्षेत्रों में भारी से अति भारी वर्षा होने की संभावना है। लगातार वर्षा के कारण तीस्ता, तोर्सा और जलढाका सहित प्रमुख नदियों के जलस्तर में वृद्धि की आशंका जताई गई है।

निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से बंगाल की खाड़ी के उत्तरी भाग और पश्चिम बंगाल के तटीय क्षेत्रों में समुद्र की स्थिति अत्यंत अशांत रहने की संभावना है। तटीय इलाकों में 35 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चल सकती हैं, जो झोंकों के साथ 55 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। मौसम विभाग ने सुरक्षा की दृष्टि से 15 जुलाई से 18 जुलाई तक मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है।

कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में बुधवार को आंशिक से घने बादल छाए रहने तथा बीच-बीच में वर्षा अथवा गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। शहर का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। उच्च आर्द्रता के कारण वर्षा से पूर्व लोगों को उमस का सामना करना पड़ सकता है।