ओंकार समाचार
रांची 21 मई। राजधानी रांची के धुर्वा स्थित पुलिस मुख्यालय में गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में 27 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वालों में प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन के 25 और जेजेएमपी के दो उग्रवादी शामिल हैं।
इन नक्सलियों में आठ ऐसे उग्रवादी भी शामिल हैं, जिन पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों के खिलाफ विभिन्न जिलों में कुल 426 मामले दर्ज हैं। आत्म समर्पण करने वाले नक्सलियों में स्पेशल एरिया कमेटी के 07 सदस्य, 7 एरिया कमांडर तथा 13 सक्रिय कैडर शामिल हैं।
भारी मात्रा में हथियार और कारतूस सौंपे
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने कई आधुनिक हथियार और गोला-बारूद भी सुरक्षा बलों को सौंपे। इनमें एक एलएमजी, पांच इंसास राइफल, नौ एसएलआर, एक बोल्ट एक्शन राइफल और अन्य हथियार शामिल हैं। इसके अलावा 31 मैगजीन और करीब 2987 जिंदा कारतूस भी जमा कराए गए।
कई जिलों में दर्ज हैं गंभीर मामले
आत्म समर्पण करने वाले नक्सली चाईबासा, सरायकेला, खूंटी, रांची और गुमला समेत विभिन्न जिलों में सक्रिय थे। इनके खिलाफ हत्या, हमला, लेवी वसूलने और नक्सली गतिविधियों से जुड़े कई गंभीर मामले दर्ज हैं।
जेजेएमपी के दो उग्रवादियों ने भी छोड़ा हिंसा का रास्ता
जेजेएमपी संगठन के दो सदस्यों ने भी अत्मसमर्पण किया है। इनमें गुमला के अपर घाट का रहने वाला सचिन बैक और कलिगा का रहने वाला श्रवण शामिल है। सचिन बैक पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था और गुमला में उसके खिलाफ छह मामले दर्ज हैं। श्रवण गोप के खिलाफ गुमला में 8 मामले दर्ज हैं।
पुलिस ने बताया बड़ी रणनीतिक सफलता
पुलिस मुख्यालय में आयोजित हुए इस आत्मसमर्पण कार्यक्रम में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने इसे झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि बताया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि शीर्ष और मध्य स्तर के नक्सलियों का आत्मसमर्पण संगठन के लिए बड़ा झटका है। लगातार चल रहे अभियान और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण उग्रवादी मुख्यधारा में लौट रहे हैं। पुलिस ने जंगलों में सक्रिय अन्य नक्सलियों से भी हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की अपील की है।
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा ने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति के तहत जो भी सुविधाएं और सहायता देनी होगी, उसे सुनियोजित तरीके से पूरा किया जाएगा। डीजीपी ने कहा कि झारखंड पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), झारखंड जगुआर और सभी खुफिया एजेंसियों ने मिलकर लगातार अभियान चलाया, जिसका परिणाम आज देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आगे भी इसी तरह संयुक्त और व्यापक अभियान जारी रहेगा, ताकि झारखंड पूरी तरह नक्सल मुक्त बन सके।
अपर पुलिस महानिदेशक मनोज कौशिक ने कहा कि आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि 27 माओवादी मुख्यधारा में लौट रहे हैं। इन्होंने हिंसा और हथियार का रास्ता छोड़कर शांति और विकास का रास्ता चुना है, जिसका स्वागत है।
सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह ने कहा कि आज का यह आत्मसमर्पण झारखंड पुलिस, झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ और कोबरा जवानों की लगातार मेहनत और जोखिम भरे अभियानों का परिणाम है। पिछले छह महीनों में सुरक्षा बलों ने जंगलों के भीतर 21 नए फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस स्थापित किए, जिससे नक्सलियों की गतिविधियों पर काफी अंकुश लगा।
इन माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण
– गादी मुंडा उर्फ गुलशन (निवासी- बुण्डू, रांची), 5 लाख रुपये का इनाम घोषित और चाईबासा, सरायकेला, रांची, खूंटी में कुल 48 मामले दर्ज।- नागेंद्र मुंडा उर्फ प्रभात मुंडा उर्फ मुखिया (निवासी- अड़की, खूंटी), 5 लाख रुपये का इनाम, चाईबासा और सरायकेला में 38 मामले दर्ज।- रेखा मुंडा उर्फ जयंती (निवासी- बुण्डू, रांची), 5 लाख का इनाम, चाईबासा और सरायकेला में 18 मामले दर्ज।- सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल (निवासी- गोइलकेरा, चाईबासा), 5 लाख का इनाम, चाईबासा में 123 मामले दर्ज।- करण तियू (निवासी- गोइल केरा, चाईबासा), 2 लाख रुपये का इनाम, चाईबासा में 29 मामले दर्ज।- दर्शन उर्फ बिंज हांसदा (निवासी- छोटानगरा, चाईबासा), 5 लाख का इनाम, चाईबासा में 14 मामले दर्ज।- सुलेमान हांसदा उर्फ सुनी हांसदा (निवासी- छोटानगरा, चाईबासा), 5 लाख का इनाम, चाईबासा में 13 मामले दर्ज।- बासुमती जेराई उर्फ बासू (निवासी- किरीबुरू, चाईबासा), एक लाख रुपये का इनाम, चाईबासा में 14 मामले दर्ज।- बैजनाथ मुंडा (निवासी- तमाड़, रांची), चाईबासा में 4 मामले दर्ज।- रघु कायम उर्फ गुणा (निवासी- मुफसिल, चाईबासा), चाईबासा में 19 मामले दर्ज।- किशोर सिरका उर्फ दुर्गा सिरका (निवासी- टोंटो, चाईबासा) चाईबासा में 11 मामले दर्ज।- राम दयाल मुण्डा (निवासी- तमाड़, रांची), सरायकेला और चाईबासा में कुल 4 मामले दर्ज।- वंदना उर्फ शांति, सुनिता सरदार, डांगुर बोइपाई, बसंती देवगम, मुन्नीराम मुण्डा, अनिशा कोड़ा उर्फ रानी, सपना उर्फ सुरू कालुंडिया, सुसारी उर्फ दसमा कालुंडिया, बिरसा कोड़ा उर्फ हरिसिंह, नुअस, बुमली तियू, निति माई उर्फ निति हेंब्रम और लादू तिरिया। इन सभी के ऊपर चाईबासा और अन्य थानों में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
