
नई दिल्ली, 4 अप्रैल । विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत में तेजी से बढ़ते भारतीय वायु परिवहन क्षेत्र की मांग को पूरा करने के लिए एक बड़े और विश्व स्तरीय उड़ान प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास की आवश्यकता है। इस दिशा में वैज्ञानिक तथा एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद(सीएसआईआर)के स्वदेशी हंसा-3 (एनजी) विमान की उपलब्धता भारत के वायु परिवहन उद्योग को मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत इस दशक के अंत तक एक प्रमुख वायु परिवहन केंद्र के रूप में विकसित होगा।
डॉ जितेन्द्र सिंह शुक्रवार को राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में आयोजित एक समारोह में सीएसआईआर द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित हंसा-3(एनजी) प्रशिक्षण विमान की प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की औपचारिकता पूरा करने के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने स्टार्टअप्स और एमएसएमई के लिए बड़े अवसर का संकेत देते हुए कहा कि वायु परिवहन प्रौद्योगिकियों के स्वदेशीकरण के माध्यम से इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण रोजगार सृजन क्षमता है। उन्होंने “आत्मनिर्भर भारत” पहल के तहत स्वदेशी छोटे विमानों के निर्माण पर जोर दिया, जो अवसंरचना के विकास और भारत में विमानों के निर्माण में छोटे और मध्यम आकार के निजी उद्यमियों को बढ़ावा देगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्वदेशी हंसा के सफल प्रदर्शन और व्यावसायीकरण के लिए सीएसआईआर के वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की।
केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि निजी क्षेत्र के साथ सहयोग करके अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भी सफलता हासिल की जाएगी। भारत को अगले 15-20 वर्षों में 30,000 पायलटों की आवश्यकता होगी, जो वर्तमान 6,000-7,000 पायलटों से अधिक है। भारत का वाणिज्यिक विमानन बेड़ा 800 से अधिक है। सामान्यत: प्रत्येक विमान के लिए संकीर्ण शरीर वाले विमानों के लिए 15-20 पायलट और लंबी दूरी के चौड़े शरीर वाले जेट के लिए 25-30 पायलटों की आवश्यकता होती है। इसलिए, देश में एक विश्व स्तरीय उड़ान प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की तत्काल आवश्यकता है।
इस मौके पर सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वि ने वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि एरो इंडिया 2025 में हंसा-3(एनजी) का सफल उड़ान प्रदर्शन सीएसआईआर की स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ये प्रयास राष्ट्रीय आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है।
उल्लेखनीय है कि हंसा-3(एनजी) दो-सीटर प्रशिक्षण विमान की लाइसेंसिंग पायनियर क्लीन एंप्स प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है। हंसा-3(एनजी) विमान एक डिजिटल डिस्प्ले (ग्लास कॉकपिट) प्रणाली से लैस है और इसे एक उन्नत ईंधन-कुशल रोटैक्स 912 आईएससी 3 स्पोर्ट्स इंजन द्वारा शक्ति मिलती है। विमान में 43 इंच की कैबिन चौड़ाई के साथ एक बबल कैनोपी और विद्युत संचालित फ्लैप हैं, जो आधुनिक उपयोगकर्ता आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। यह 620 समुद्री मील की दूरी, 7 घंटे का सहनशीलता और 98 नॉट्स कैलिब्रेटेड एयरस्पीड की अधिकतम क्रूज़ स्पीड के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रदान करता है।